Kalicharan Controversy 2021| Kalicharan Maharaj Biography | अभिजीत से कालीचरण बनने की कहानी

Kalicharan Controversy 2021: देश में रोज़ कई ऐसे घटनाएं घट रही है जिसे कुछ लोग बढ़ावा भी दे रहे हैं तो कुछ लोग गलत चीज़ को नकार भी रहे हैं, इन्हीं घटनाओं में से एक और घटना घटी जिसे आप सब भी वाकिफ होंगे आज स्थिति ये आ गई है की जिनके सम्मान में हमें सिर झुकाने चाहिए उन्हें लोग गाली दे रहें है, ऐसा तो संस्कार इस देश और समाज का पहले नहीं था आज ऐसा क्यूं हो रहा है हम सब को इस पर विचार करने और अपने पूर्वजों का सामान करने की आवश्यकता है।

पिछले दिनों छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक धर्म संसद का आयोजन हुआ था जिसमें देश के वो सभी हिंदू धर्म के गन्यमान महाराज पहुंचे थे वहां उन सभी धर्म गुरुओं का काम था हिंदू धर्म पर अपनी वचन से लोगों को ज्ञान देना लेकिन हुआ कुछ और। उनसभी धर्मगुरुओं में एक महाराज भी थे जिनका नाम ‘कालीचरण‘ है उन्होंने एक ऐसा ब्यान दिया की पूरे देश में उनकी विरोध शुरू हो गया उन्हीं में से एक और महाराज थे जिन्होंने इस तरह का ब्यान सुनने के बाद वो इस धर्म संसद से अपने आप को अलग करते हुए सभा से निकल गए।

Kalicharan Maharaj Biography (कालीचरण महाराज की जीवन परिचय)

 Kalicharan Maharaj Biography में हम संक्षिप्त रूप से इनके जीवन से जुड़े बातों का हम जिक्र करेंगे। कालीचरण मूल रूप से महाराष्ट्र के आकोली के पुराना शहर शिवाजी नगर के रहने वाले हैं उनकी प्रारंभिक जीवन भी उधर हीं बीता। इनका पूरा और असली नाम अभिजीत धनंजय सराग है इनके पिता का नाम धनंजय सराग है इनके पिता एक अंग्रेजी दवाखाना चलते हैं और ये एक मध्यम वर्ग से और भावसार समाज से आते हैं।

पूरा नामअभिजीत धनंजय सराग
उपनामकालीचरण
पिता नामधनंजय सराग
पताशिवाजी नगर,आकोली,महाराष्ट्र
शिक्षाआठवीं पास
जाति/समाजभावसार
पेशाहिंदू धर्म गुरु

Kalicharan Controversy 2021 (कालीचरण का गांधी जी पर विवादस्पद ब्यान)

Kalicharan Controversy 2021 बीते दिनों छत्तीसगढ़ के रायपुर में हिंदू धर्म संसद का आयोजन किया गया जिसमें पूरे देश के धर्मगुरु आमंत्रित हुए जिसमें कालीचरण महाराज भी शामिल हुए इनको भी धर्म से जुड़े ज्ञान को उस सभा के माध्यम से पूरे देश में एकता और भाईचारे का संदेश देना था लेकिन इन्होंने देश के राष्ट्रपिता श्री महात्मा गांधी जी को अपशब्द कहते हुए कहा “इस्लाम का लक्ष्य राजनीति के माध्यम से राष्ट्र पर कब्जा करना है. हमारी आंखों के सामने उन्होंने 1947 में कब्जा कर लिया था… उन्होंने पहले ईरान, इराक और अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था। उन्होंने राजनीति के माध्यम से बांग्लादेश और पाकिस्तान पर कब्जा कर लिया था… मैं नाथूराम गोडसे को साष्टांग प्रणाम करता हूं और उनकी सराहना करता हूं कि उन्होंने मोहनदास करमचंद गांधी की हत्या की”।

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