The East India Company History: जिसने 200 वर्षों से ज्यादा हमपर शासन किया उसपर एक भारतीय राज कर रहा है

The East India Company History: आज आप सभी को एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहा हूं जिसके बारे में जानने के बाद आप भी कहेंगे वाह क्या बात है कहानी है वहीं अंग्रेजी कंपनी जिसने हमारे देश भारत को कई वर्षों तक गुलाम बनाए रखा जिसका नाम है ईस्ट इंडिया कंपनी आज के समय में यह कंपनी क्या कर रही है और इसके कौन मालिक है इसके बारे में बात करते हैं..

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The East India Company History In Hindi

The East India Company History
The East India Company

15 अगस्त 2022 (Happy Independence Day) को पूरा देश अपनी आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने पर आजादी का अमृत महोत्सव मनाया और पूरे देश के सभी धर्म समुदाय के लोग अपने वीर सपूतों के बलिदान को याद करके अपने आप को देश भक्ति के धुन में लीन कर लिया। 15 अगस्त 1947 को आजादी मिलने के बाद से अब तक भारत की यात्रा बहुत रोचक रही है इन 75 सालों के दौरान भारत लगभग सभी क्षेत्रों में काम करते हुए दुनिया के पटल पर अपना नाम बड़े गर्व से रखा है।

विश्व का कोई ऐसा देश नहीं है जहां आज कोई भी भारतीय अपना ब्रजस्व स्थापित न किया हो यह हमें अहंकार नहीं बल्कि फक्र है की हां हम भारतीय हैं जो अपने लग्न और परिश्रम के दम पर दुनिया भर में अपना और अपने देश का नाम रौशन कर रहे हैं। आज इसी कड़ी में एक ऐसा नाम बताने जा रहा हूं जिन्होंने अपने परिश्रम और धन की बदौलत जो वर्षों तक हम सब को गुलाम बनाया आज उसी कंपनी के मालिक बन बैठे हैं।

East India Company का भारत में आगमन

ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company History) का नाम भला कौन भारतीय नहीं जानता होगा! जिस किसी ने 8वीं-10वीं तक भी इतिहास पढ़ा है उसे इस कंपनी का नाम भली-भांति ज्ञात होगा. यहां तक कि जो लोग कभी स्कूल नहीं गए, वे भी कंपनी राज (Company Raj) के नाम से ईस्ट इंडिया कंपनी से गाहे-बेगाहे अवगत हैं.

17वीं सदी की शुरुआत में यानी सन 1600 ईस्वी के आस-पास भारत की जमीन पर पहला कदम रखने वाली इस कंपनी ने सैकड़ों साल तक हमारे देश पर शासन किया. इसके बाद 1857 में इस कम्पनी ने भारत से अपना साम्राज्य समेटने की तैयारी शुरू कर दी।

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     ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 31 दिसंबर 1600 को हुई थी. इस कंपनी को बनाने के पीछे एकमात्र उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्यवाद और औनपिवेशीकरण को बढ़ावा देना था. ब्रिटेन के उस दौर के बारे में एक कहावत बहुत प्रचलित है कि ब्रिटिश राज में सूरज कभी अस्त नहीं होता. सूरज के परिक्रमा पथ की परिधि से भी ब्रिटिश साम्राज्य को बड़ा बना देने में सबसे अहम योगदान इसी ईस्ट इंडिया कंपनी का था.

      कंपनी मूलत: व्यापार करने के लिए बनाई गई थी, लेकिन उसे कई विशेषाधिकार प्राप्त थे, जैसे युद्ध करने का अधिकार, कंपनी को ब्रिटिश राज ने यह अधिकार अपने व्यापारिक हितों की रक्षा करने के लिए दिया था इसी कारण ईस्ट इंडिया कंपनी के पास अपनी ताकतवर सेना भी हुआ करती थी.

स्पेन और पुर्तगाल से होड़ में बनी कंपनी

1600 के दशक के दौर में साम्राज्यवाद और व्यापार की होड़ में स्पेन और पुर्तगाल का जलवा था. ब्रिटेन और फ्रांस इसमें देर से उतरे थे लेकिन तेजी से दबदबा बढ़ा रहे थे. पुर्तगाल के नाविक वास्कोडिगामा के भारत आने के बाद यूरोप में बड़ा बदलाव आया. वास्कोडिगामा अपने साथ जहाजों में भरकर भारतीय मसाले ले गया था.

उस समय यूरोप के लिए भारतीय मसाले अनोखी चीज थी इन मसालों से वास्कोडिगामा ने अकूत संपत्ति अर्जित की. इसके बाद पूरे यूरोप में भारतीय मसालों की महक पसर गई. भारत की संपन्नता के चर्चों ने भी यूरोपीय साम्राज्यवादी देशों को यहां दबदबा बनाने के लिए प्रेरित किया. ब्रिटेन की ओर से यह काम किया ईस्ट इंडिया कंपनी ने.

East India Company का पहला व्यापार

इस कंपनी को पहली सफलता हाथ लगी थी पुर्तगाल का एक जहाज लूटने से, जो भारत से मसाले भरकर ले जा रहा था. ईस्ट इंडिया कंपनी को उस लूट में 900 टन मसाले मिले. इसे बेचकर कंपनी ने जबरदस्त मुनाफा कमाया. यह उस समय की पहली चार्टेड ज्वाइंट स्टॉक कंपनियों में से एक थी, यानी कहें तो अभी के शेयर मार्केट में लिस्टेड कंपनियों की तरह कोई भी इन्वेस्टर उसका हिस्सेदार बन सकता था.

लूट की कमाई का हिस्सा कंपनी के इन्वेस्टर्स को भी मिला. इतिहास की किताबों में बताया जाता है कि लूट से किए गए पहले व्यापार में ईस्ट इंडिया कंपनी को करीब 300 फीसदी का जबरदस्त मुनाफा हुआ था.

East India Company का भारत में वर्चस्व

भारत में सर थॉमस रो ने मुगल बादशाह से ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए व्यापार का अधिकार हासिल किया. कंपनी ने कलकत्ता (अभी कोलकाता) से भारत में बिजनेस की शुरुआत की और बाद में चेन्नई-मुंबई भी उसके प्रमुख व्यापारिक केंद्र बने. भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी को सबसे पहले फ्रांसीसी कंपनी ‘डेस इंडेस’ का मुकाबला करना पड़ा.

1764 ईस्वी की बक्सर की लड़ाई कंपनी के लिए निर्णायक साबित हुई. इसके बाद कंपनी ने धीरे-धीरे पूरे भारत पर अधिकार स्थापित कर लिया. 1857 ईस्वी के विद्रोह के बाद ब्रिटिश साम्राज्य ने भारत का शासन कंपनी के हाथों से छीनकर अपने हाथों ले लिया. बहरहाल अब यह दुनिया की सबसे अमीर कंपनियों की गिनतियों में कहीं नहीं ठहरती. भारतीय मूल के (Indian Businessman) संजीव मेहता ने 2010 में 15 मिलियन डॉलर यानी 120 करोड़ रुपये में खरीद लिया.

अब बन गई है E-commerce Company

एक हिसाब से कहें तो ईस्ट इंडिया कंपनी भारत की पहली कंपनी थी, भले ही यह भारतीय न होकर अंग्रेजों की थी. इसी कंपनी ने भारत को गुलामी की बेड़ियां भी पहनाई. एक समय यह कंपनी एग्रीकल्चर से लेकर माइनिंग और रेलवे तक सारे काम करती थी. अब मजेदार है कि भारत को गुलाम बनाने वाली इस ईस्ट इंडिया कंपनी के मालिक भारतीय मूल के बिजनेसमैन संजीव मेहता (Sanjiv Mehta) हैं. मेहता ने ईस्ट इंडिया कंपनी को खरीदने के बाद इसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म बना दिया. अभी यह कंपनी चाय, कॉफी, चॉकलेट आदि की ऑनलाइन बिक्री करती है.

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