कलयुग में चीर हरण | नारी शक्ति का नहीं लो इम्तिहान (1)

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बहुत हीं दुःख के साथ ये कहानी लिखने जा रहा हूं जिसका शीर्षक है कलयुग में चीर हरण इस कहानी में जो द्वापर युग में घटना घटित हुई थी वही घटना आज कलयुग में भी हो रही है। वहां तो साक्षात भगवान श्री कृष्ण द्रौपदी की इज्ज़त बचाने आ गए थे और यहां तो भगवान के रूप में उपस्थित शासन-प्रशासन मूक दर्शक बने हुए हैं रोज़ न जाने कितनी ऐसी देश की मां, बहन और बेटियां की अस्मिता को सरेआम उछाला जा रहा है।

न राम और न हीं कृष्ण कौन बचाएगा इस कलयुग में (कलयुग में चीर हरण)

कलयुग में चीर हरण (सच्ची कहानी)
चीर हरण

द्वापर युग में द्रोपदी का चीर हरण दुर्योधन के द्वारा किया गया था, युधिष्ठिर ने जब जुआ में अपने पत्नी तक को दांव पर लगा दिया और हार भी गया तब दुर्योधन ने अपने सैनिक को आदेश दिया की द्रोपदी को उठा कर ले आयो और जब भरे समाज में द्रोपदी का वस्त्र उतारा जाने लगा तो सारा ब्रह्माण्ड हिल गया और उस समय द्वारिका के राजा और द्रोपदी को बहन बनाने वाले श्री कृष्ण जी ने एक स्त्री की आबरू को बचाया था।

इस कलयुग में रक्षक ही बने भक्षक (कलयुग में चीर हरण)

(कलयुग में चीर हरण) 2
चीर हरण2
ऐसी ही घटना आज कलयुग में भी हो रही है यहां तो कोई किसी जुआ या कर्ज में अपनी पत्नी,बहन या बेटी को नहीं हार रहा बल्कि देश का जो संविधान है और उसमें जो समानता का अधिकार दिया गया है उसका फायदा उठा कर लोग इस कु कृत्य को कर रहे हैं आज कोई श्री कृष्ण नहीं आ रहे हैं.
      क्योंकि सविधान ने जो ईश्वर के रूप में शासन और प्रशासन को देश के हरेक कोने में स्थापित किया है वो या तो दुर्योधन बन गई है या तो मूकदर्शक के रूप में खड़ा है। रोज आए दिन देश ही नहीं बल्कि विदेश में भी लगातार कोई न कोई मां बहन बेटी की अस्मिता को सरेआम उछाला जा रहा है कोई उस पर करवाई करने को तैयार नहीं है।        
       लोग हैवानियत पर इतने उतर गए हैं की उसके पति और बच्चे के सामने सिर्फ इसलिए उसका वस्त्र उतार दिए की वो उसके सामने चुनाव में खड़ी हो गई। एक कुर्सी के लिए किसी की जिदंगी बर्बाद कर देना ये कहां की न्याय व्यवस्था है।    

एक दलित महिला अगर किसी ऊंचे अधिकारी के नीचे काम करती है तो उसका शारीरिक और मानसिक शोषण किया जा रहा है ये कब और कौन सा संविधान आज्ञा देता है। किसी ने सच ही कहा है कि “जिस देश या परिवार में कोई भी महिला का अपमान हो उसे परिवार या देश का विकास नहीं हो सकता“। “महिलाओं का जो करे अपमान, वह पुरुष है पशु समान!” (कलयुग में चीर हरण)

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      मैं इस आर्टिकल के माध्यम से शासन और प्रसाशन से निवेदन करना चाहता हूँ की समय रहते बचा लो देश की इज्जत नहीं तो वो दिन दूर नहीं की अपने देश की बाहर के दुश्मन से लड़ने के बजाये अपने घर में ही दुश्मनों का कारखाना हो जायेग।
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